Wednesday, December 18, 2019

निर्भया केस: क्या होता है ब्लैक वारंट, जिससे होती है फांसी

निर्भया के दोषियों को डेथ वारंट जारी करने की सुनवाई को पटियाला हाउस कोर्ट ने टाल दिया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई सात जनवरी को होगी। कोर्ट जैसे ही इस मामले के दोषियों को लेकर ब्लैक वारंट यानी मौत के पैगाम जारी करेगा वैसे ही ये आरोपी फांसी पर लटका दिए जाएंगे। 

निर्भया केस में ब्लैक वारंट जारी होते ही आजादी के बाद भारत में फांसी पाने वाले ये 58वें, 59वें, 60वें और 61वें दोषी होंगे। आखिरी बार फांसी 1993 के बम धमाके में दोषी याकूब मेमन को 2015 में दी गई थी। जेल प्रशासन के सुझाव और तैयारियों को देखकर अदालत फांसी की तारीख और वक्त मुकर्रर करेगी जिसे आम भाषा में ब्लैक वारंट कहा जाता है। 

ब्लैक वारंट जारी होते ही जेल प्रशासन जल्लाद के इंतजाम में जुट जाएगी। बता दें कि कसाब, अफजल गुरू और याकूब मेमन को फांसी किसी पेशेवर जल्लाद ने नहीं, बल्कि जेल के कर्मचारी ने दी थी।

एक तख्त पर दो दोषियों को दी जा सकती है फांसी
तिहाड़ में जो फांसी घर है उसके तख्त की लंबाई करीब दस फीट है, जिसके ऊपर दो दोषियों को आसानी से खड़ा किया जा सकता है। इस तख्ते के ऊपर लोहे की रॉड पर दो दोषियों के लिए फंदे लगाने होंगे। तख्त के नीचे भी लोहे की रॉड होती है, जिससे तख्त खुलता और बंद होता है। इस रॉड का कनेक्शन तख्त के साइड में लगे लिवर से होता है। लिवर खींचते ही नीचे की रॉड हट जाती है और तख्त के दोनों सिरे नीचे की तरफ खुल जाते हैं, जिससे तख्त पर खड़ा दोषी के पैर नीचे झूल जाते हैं। हालांकि जेल प्रशासन का कहना है कि वह दोषियों को एक-एक कर फांसी देंगे। 

दोषियों के वजन से तैयार होते हैं फंदे

जेल अधिकारियों के मुताबिक, दोषियों के वजन के हिसाब से फंदे की रस्सी की लंबाई तय होती है। तख्त के नीचे की गहराई करीब 15 फीट है, ताकि फंदे पर लटकने के बाद झूलते पैर का फासला हो। कम वजन वाले दोषी को लटकाने के लिए रस्सी की लंबाई ज्यादा रखी जाती है, जबकि भारी वजन वाले के लिए रस्सी की लंबाई कम रखी जाती है। सूत्रों का कहना है कि अफजल की फांसी के ट्रायल के दौरान दो बार रस्सी टूट गई थी।   

वसीयत और आखिरी मुलाकात
फांसी दिए जाने से पहले दोषी अगर वसीयत तैयार करना चाहता है और अपने रिश्तेदार से मिलने की ख्वाहिश करता है तो उसे इस बात की इजाजत दी जाती है। वसीयत तैयार करने के दौरान मजिस्ट्रेट को जेल में बुलाया जाता है। फांसी के दिन दोषी को नहाने के बाद पहनने के लिए नए कपड़े दिए जाते हैं।

फंदे पर लटकाने की यह होती है प्रक्रिया

दोषी को तैयार करने के बाद मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में दोषी को सेल से फांसी के तख्ते पर ले जाया जाता है। इस दौरान उसके चेहरे को कपड़े से ढक दिया जाता है ताकि वह आसपास चल रही गतिविधि को नहीं दे सके। फांसी के तख्ते तक ले जाने के दौरान मौत को सामने देखकर दोषी चल नहीं पाता है। ऐसी स्थिति में उसके साथ चल रहे पुलिसकर्मी उसे सहारा देकर ले जाते हैं। जेल मैन्युअल के अनुसार, इस दौरान एक डॉक्टर, सब डिविजनल मजिस्ट्रेट, जेलर, डिप्टी जेलर और करीब 12 पुलिसकर्मी मौजूद रहते हैं।  
फांसी घर में एकदम खामोशी होती है। यहां सारी कार्रवाई इशारों में होती है। ब्लैक वारंट में तय समय पर दोषी को वहां लाकर उसकी गर्दन में फंदा पहनाया जाता है, फिर जेलर के रुमाल गिराकर इशारा करने पर जल्लाद या फिर जेल का कर्मचारी लिवर को खींच देता है। लिवर खींचते ही तख्त खुल जाता है और फंदा पर लटका दोषी नीचे चला जाता है। कुछ देर बाद डॉक्टर वहां पहुंचकर उसकी जांच करता है। धड़कन बंद होने की पुष्टि होने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया जाता है। उसके बाद उसे फंदे से उतार लिया जाता है।  

Saturday, November 30, 2019

एराज़ लखनऊ मेडिकल कालेज को मिला स्काॅच अवार्ड

एराज़ लखनऊ मेडिकल कालेज को मिला स्काॅच अवार्ड

लखनऊ । गरीब मरीजों के इलाज के लिए चल रही आयुष्मान भारत योजना को बेहतर ढंग से लागू करने वाले यूपी के प्रसिद्ध चिकित्सा संस्थान एराज़ लखनऊ मेडिकल कालेज एण्ड हास्पिटल को स्काॅच एवार्ड से नवाजा गया। इण्डिया इकोनोमिक्स फोरम दिल्ली द्वारा यह एवार्ड दिया गया।
एराज़ लखनऊ मेडिकल कालेज जो प्रदेश में गरीब मरीजों को आधुनिक इलाज उपलब्ध कराने के लिए प्रसिद्ध है। प्रदेश व देश के कई नामी चिकित्सा संस्थानो को पछाडते हुए एराज ने यह उपलब्धि हासिल की। आयुष्मान भारत योजना की कैटेगरी मे पुरस्कार पाने के लिए प्रदेश के दर्जनों चिकित्सा सस्थानों ने आवेदन दिया था। फोरम द्वारा तय कई मानकों पर जब उन सस्थाओं को परखा गया तो सिर्फ एराज़ लखनऊ मेडिकल कालेज ही मानक पूरे कर सका। ज्ञात हो कि एराज़ लखनऊ मेडिकल कालेज एवं हास्पिटल में आयुष्मान योजना गत वर्ष अक्टूबर माह में लागू की गई थी। मात्र 13 माह में एराज़ लखनऊ मेडिकल कालेज में योजना के तहत सैकड़ो मरीजों को लाभान्वित किया जा चुका है इसमें 70 से अधिक हृदय रोग व जोड़ प्रत्यारोपण सर्जरी प्रमुख हैं।
देश के प्रतिष्टित स्काॅच एवार्ड के लिए देश के सभी प्रमुख सरकारी व गैर सरकारी चिकित्सा सस्थानों ने आवेदन किया था। इसमें 95 प्रतिशत के करीब सरकारी चिकित्सा सस्थान थे लेकिन निजी चिकित्सा संस्थान एराज़ लखनऊ मेडिकल कालेज ने सिलवर एवार्ड अपने नाम करते हुए सफलता के झण्डे गाड़े। मालूम हो कि आयुष्मान योजना की श्रेणी में गुजरात व हरयाणा के स्टेट हेल्थ सोसायटी को गोल्ड मिला। डाॅ0 डी0के0 वासुनकर व डाॅ0 नवीन सिंह ने बताया कि एराज़ लखनऊ मेडिकल कालेज एवं हास्पिटल को स्काॅच आर्डर-आॅफ मेरिट के लिये भी चयनित किया गया। यह एवार्ड का सेमीफाइनल राउण्ड था और यूपी से सिर्फ एराज़ लखनऊ मेडिकल कालेज ही था जो इसमें स्थान बना सका। डाॅ0 वासुनकर नें बताया कि मेडिकल कालेज में गरीब मरीजों का ध्यान में रखते हुए चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करायी जाती रही हैं और योजना लागू होने के बाद भी उन्हें उसी प्रकार उच्च स्तर का इलाज मुहैया कराया जा रहा है।




आयुष्मान योजना के तहत सफल उपचार और सर्जरी में एरा मेडिकल कालेज यू0पी0 व उत्तराखण्ड सहित कई राज्यो में पहले पायदान पर है। एरा मेडिकल कालेज के कार्य की सराहना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद कर चुके है। आयुष्मान योजना  के प्रथम वर्षगांठ पर गत 23 सितम्बर को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुतरित वीडियो मे एरा मेडिकल कालेज के कार्य को भी सराहा गया था। कुछ दिन पहले तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह को खुद एरा मेडिकल कालेज आकर यहां आयुष्मान योजना के तहत हो रहे गरीब मरीजों के उपचार की सराहना की थी।


एराज़ लखनऊ मेडिकल कालेज एवं हास्पिटल,
लखनऊ

manusmriti and samvidhan

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Thursday, November 28, 2019

भाजपा ! सफलता के शिखर पर असफलता!!

भाजपा के बड़ों ने कराई फजीहत!

अपराजेय योद्धा शरद के सामने अजित हुए पराजित ।

भाजपा का सत्ता अभियान छीछालेदर के साथ महाराष्ट्र में रुका।

विपक्ष में ना बैठना एवं शिवसेना की ना मानना पड़ा भारी?


👍👍 महाराष्ट्र में संपन्न चुनाव के बाद जहां भाजपा  थी वहीं से  थोड़ा आगे दौड़ कर फिर वही पहुंच गई। भाजपा की फजीहत भाजपा के बड़े रणनीतिकारों की वजह से हो गई! सभी का निशाना चूक गया और बड़ी छीछालेदर के साथ पार्टी का सत्ता अभियान यहां रुक गया? अपराजित योद्धा शरद पवार के सामने बागी भतीजे अजित पवार पराजित हो गये। साफ है कि इस पूरे मामले में देवेंद्र फडणवीस की इस्तीफे के बाद भाजपा को साख के मुद्दे पर भारी कीमत चुकानी पड़ी है!

देश एवं देश के अधिकांशतया प्रदेशों में सत्ता पर काबिज भाजपा को महाराष्ट्र में तगड़ा झटका लगा है। यहां हाल ही में मुख्यमंत्री पद की शपथ लिए देवेंद्र फडणवीस इस्तीफा दे चुके हैं। बागी अजित पवार भी इस्तीफा देकर अपने राजनीतिक भविष्य की अंधी सुरंग में है! पूरे मामले में यहाँ शिवसेना एनसीपी एवं कांग्रेस को साथ लाकर अपनी मुहिम में कामयाब दिख रही है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भाजपा के रणनीतिकारों में जैसे खलबली मच गई। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री की मुलाकात हुई और उसके बाद देवेंद्र फडणवीस का इस्तीफा हो गया। यदि पूरे मामले को बारीकी से देखा जाए तो यह स्पष्ट नजर आ रहा है कि इस मुद्दे पर सबसे ज्यादा किसी पार्टी की किरकिरी हुई है तो वह है भाजपा? चर्चाओं के मुताबिक भाजपा यहां जिस प्रकार से सत्ता के लिए उतावली थी उसका उतावलापन ही उसकी साख पर बट्टा लगा गया! भाजपा के रणनीतिकार महाराष्ट्र में फेल हो गए! उन्होंने शरद पवार के घर सेंध लगाई लेकिन अजित पवार भाजपा के लिए असफलता का कलंक बन गए।

महाराष्ट्र की जनता ने वैसे तो शिवसेना एवं भाजपा को जनादेश देकर सत्ता में वापस लाने का काम किया था। लेकिन शिवसेना जब मुख्यमंत्री के पद पर अड़ी तो भाजपा को यह रास नहीं आया। महाराष्ट्र में भाजपा का दिल बड़ा नहीं दिखा। यदि ऐसा होता तो आज शिवसेना व भाजपा की सरकार महाराष्ट्र में बनी नजर आती। भाजपा ने शिवसेना को झिड़क दिया!

शिवसेना ने भी सत्ता के उतावलापन में एनसीपी कांग्रेस से जाकर हाथ मिला लिया। कई दिनों तक सियासी प्रपंच हुए और फिर कांग्रेस शिवसेना तथा एनसीपी सरकार बनाने को राजी हो गए।  रात का सपना रात में ही बिखर गया और सुबह मुख्यमंत्री पद पर देवेंद्र फडणवीस ने अजित पवार के साथ शपथ ले ली ।महाराष्ट्र का मामला सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट के निर्देश दिए लेकिन 27 नवंबर से पहले ही मुख्यमंत्री का इस्तीफा महाराष्ट्र को नए पथ पर लेकर चला गया।

महाराष्ट्र  में यदि कोई अपराजेय योद्धा बन कर उभरा तो वह है एनसीपी नेता शरद पवार ।शरद पवार ने यह दिखा दिया कि आज भी रणनीति के मामले में उनका कोई सानी नहीं है। वह भाजपा को महाराष्ट्र में आमने-सामने बैठकर चुनौती दे सकने में सफल है। बागी अजित पवार डींगें मार रहे थे कि उनके साथ एनसीपी के काफी विधायक हैं लेकिन बेचारे भाजपा के लिए कुछ ना कर पाए। उप मुख्यमंत्री पद से तो छुट्टी मिली है अलबत्ता अब एनसीपी में भी उनकी राह कठिन है।

राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक भाजपा ने महाराष्ट्र में बड़ी गलती की है। उसके चाणक्य कहे जाने वाले बड़े रणनीतिकार यहां पर धूल फांक बैठे ! पार्टी ने सत्ता के उतावलेपन में शुचिता एवं वैचारिक प्रतिबद्धता तो खोयी ही अलबत्ता उसका सत्ता अभियान भी महाराष्ट्र में बड़ी छीछालेदर के साथ रुक गया है। काश भाजपा यहां विपक्ष में ही बैठती अथवा वह शिवसेना को आगे करती तो शायद उसकी इज्जत बची रहती! लेकिन भाजपा को भी बस केवल महाराष्ट्र में कुर्सी और सत्ता नजर आ रही थी! आखिरकार भाजपा के बड़े इस अभियान में अपने हाथ जला बैठे और पूरे देश में भाजपा की जमकर फजीहत करवा डालें? जाहिर है कि इससे जहां भाजपा को आत्ममंथन करने की आवश्यकता होगी वहीं अब देश में विपक्ष के नेता भी अपनी एकता को नए सिरे से आगे बढ़ाने में कामयाब होंगे!

 भाजपा को शिवसेना को सत्ता देने से परहेज था लेकिन एनसीपी से हाथ मिलाने में परहेज नहीं था! उसी तरह एनसीपी और कांग्रेस ने भी भाजपा को भले ही खूब कोसा हो लेकिन हिंदुत्व के अलंबरदार शिवसेना को साथ लेने में उसे भी कोई परहेज नहीं दिखा!

मैं कृष्ण कुमार द्विवेदी राजू भैया  राजनीतिक विश्लेषकों से चर्चा के बाद  यह अनुमान लगा सकता हूं कि देश की सियासी स्थिति करवट ले रही है? आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति का असर देश के अन्य प्रांतों पर भी पड़ेगा। फिलहाल इसके लिए इंतजार करना होगा ।लेकिन कुछ भी हो महाराष्ट्र में अब नई सरकार के गठन की हवा चल पड़ी है। भाजपा के देवेंद्र फडणवीस एवं बागी अजित पवार इस्तीफा देकर विपक्ष में बैठने की अवस्था में है। जबकि शिवसेना ,कांग्रेस एन सी पी सत्ता पर काबिज होने के लिए तैयारी में जुटे हैं।

इस पूरे नाटक का पटाक्षेप होता नजर आ रहा है। लेकिन इस सियासी प्रदर्शन सबसे ज्यादा यदि किसी की साख को बट्टा लगा है तो वह है भाजपा? स्पष्ट है कि अब भाजपा के बड़े रणनीतिकारों को भी अहंकार की चोटी से नीचे उतर के लिए सोचना होगा! उन्हें समझना होगा कि राजनीति में उन्हें भी टक्कर देने वाले लोग आज भी देश में हैं।  जरूरी है कि भाजपा के रणनीतिकार आगे से अब पार्टी की फजीहत ना हो इसके लिए ईमानदारी से सोचें!

Wednesday, November 27, 2019

ajib hadsa per kar ko chirte huye nikla

फ्रांस में रातों रात एक पेड़ कार को चीरता  हुआ निकला है ये कैसे हुआ कोई नही जानता  सिर्फ अल्ल्लाह जानता है

प्राईवेट ट्रेन तेजस से छटनी शुरू हुई

*Lucknow*


*प्राईवेट ट्रेन तेजस से छटनी शुरू हुई*


तेजस ट्रेन से बिना नोटिस के 20 लोगों को नौकरी से निकाला


40 में से आधे स्टाफ़ को प्राइवेट कंपनी ने तेजस से हटाया


केबिन क्रू, अटेंडेंट, सहित कई पदों पर छटनी


निकाले गए स्टाफ का दर्द,18-18 घण्टे तेजस में डियूटी


बिना नोटिस के तेजस एक्सप्रेस से की जा रही है छटनी


लखनऊ से दिल्ली चलती है सबसे महंगी प्राइवेट ट्रेन

भाजपा विधायक नन्द किशोर गुर्जर पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी को बंधक बना कर पीटने का आरोप*

*गाज़ियाबाद*

*भाजपा विधायक नन्द किशोर गुर्जर पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी को बंधक बना कर पीटने का आरोप*

लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर व उनके प्रतिनिधि समेत 10 लोगों पर  मुक़दमा दर्ज

सरकारी अफसरों से मारपीट करने का आरोप, अफसरों को बंधक बनाकर मारपीट का आरोप, खाद्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर लोनी थाने में मुक़दमा दर्ज

पुलिस साइंस कांग्रेस

लखनऊ ।

पुलिस साइंस कांग्रेस

पांडुचेरी की राज्यपाल किरण बेदी ने शोधपत्रों की पुस्तिका का विमोचन किया।

पूर्व में हुए 29 शोधपत्रों को पुस्तिका में मिली है जगह.

पुडुचेरी की लेफ्टिनेंट गवर्नर डॉ किरण बेदी का बयान-

अयोध्या फैसले के दौरान यूपी सरकार और पुलिस ने बेहतर काम किया,

यूपी पुलिस को इसके लिए मैग्सेसे पुरुस्कार मिलना चाहिए.

कुंभ के सफल आयोजन पर यूपी पुलिस का पूरी दुनिया मे सम्मान बढ़ा है- डॉक्टर बेदी

बीट पुलिसिंग का आज भी कोई विकल्प नहीं है,बीट पुलिसिंग में कांस्टेबल को जिम्मेदार बनाया जाता है- डॉक्टर बेदी

बीट पुलिसिंग के लिए बेहतरीन कांस्टेबल को चुनना चाहिए,
अधिकारियों को भी बीट पुलिसिंग में हिस्सा लेना चाहिए,बीट पुलिसिंग के बगैर अपराध रोकना संभव नहीं है।
बीट पुलिसिंग में मार्निंग रोल कॉल में अफसरों को जाना चाहिए,
वीआईपी मूवमेंट, लॉ एंड ऑर्डर के चलते भी बीट पुलिसिंग को नहीं छेड़ना चाहिए,यूपी के सीएम भी शाम की फुट पेट्रोलिंग पर ज़ोर देते हैं जो बहुत जरूरी है- डॉक्टर बेदी

पूरे देश में बीट पुलिसिंग की सख़्त जरूरत है,बीट पुलिसिंग से इलाके के हर व्यक्ति की जानकारी होती है- डॉक्टर बेदी

हर इलाके में बीट बॉक्स या बूथ होना चाहिये जहां बीट पुलिसमैन बैठता हो।
जनता की मदद से हमने बीट बॉक्स और बूथ बनाए- डॉक्टर बेदी

बीट पुलिसिंग पुलिसिंग की रीढ़ है।
मेरे मैग्सेसे अवार्ड में बीट बॉक्स का ज़िक्र है-डॉक्टर बेदी


हर पुलिसकर्मी को अपनी वर्दी को मंदिर मानना चाहिए,मंदिर में कोई अन्याय नहीं होना चाहिए-डॉक्टर बेदी

पुलिस को न्याय और हिम्मत से काम करना चाहिए,यूपी पुलिस को बेहतर नेतृत्व और संसाधन मिल रहा है- डॉक्टर बेदी

Tuesday, November 26, 2019

संविधान दिवस’ पर राज्यपाल धनखड़ और ममता में संविधान को लेकर रार

संविधान दिवस’ पर राज्यपाल धनखड़ और ममता में संविधान को लेकर रार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Updated Wed, 27 Nov 2019 06:24 AM IST
ममता बनर्जी
ममता बनर्जी - फोटो : ANI
पश्चिम बंगाल में राज्यपाल जगदीप धनखड़ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच चल रही रार मंगलवार को भी जारी रही। राज्य की सत्ता के दोनों शीर्ष स्तंभों के बीच ‘संविधान दिवस’ के मौके पर संविधान को ही लेकर जमकर जुबानी तीर चले। धनखड़ ने ममता पर हमला बोलते हु कहा कि राज्य के सांविधानिक प्रमुख के पद से ‘गंभीर समझौता’ हुआ है। इससे पहले बनर्जी ने आश्चर्य जताते हुए कहा था कि उनसे (ममता से) राजभवन में पहले रहे लोगों को क्यों कभी समस्या नहीं हुई।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच यह जुबानी जंग उस समय हुई, जब राज्य विधानसभा भारतीय संविधान को ग्रहण किए जाने की 70वीं वर्षगांठ के तौर पर विशेष सत्र आयोजित किया था। हालात ऐसे रहे कि दोनों शीर्ष सांविधानिक पदाधिकारियों ने सदन के अंदर एक-दूसरे के साथ न तो अभिवादन किया और न ही कोई अन्य बात की।

धनखड़ ने सदन को संबोधित करते हुए, राज्य के सांविधानिक प्रमुख के पद से गंभीर समझौता हुआ है। यह एक अप्रत्याशित और चुनौतीपूर्ण स्थिति है। मैं सभी जनप्रतिनिधियों से अपनी अंतररात्मा की आवाज सुनने की अपील करता हूं। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा कश्मीर में अनुच्छेद-370 के प्रावधान खत्म करने का भी जिक्र किया।

राज्यपाल द्वारा अपना भाषण समाप्त किए जाने के बाद वहां मौजूद विधायकों ने मेजें नहीं थपथपाईं, जबकि टीएमसी के विधायकों ने ‘जय बांग्ला’ और ‘जय हिंद’ के नारे लगाए। इसके बाद राज्यपाल ममता से कोई बात किए बगैर सभा से चले गए। ममता उनके पीछे गईं, लेकिन राज्यपाल की तरफ से कोई अभिवादन नहीं किया गया।

राज्यपाल के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सदन को संबोधित किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, हमारे राज्यपाल ने बहुत अच्छा भाषण दिया, लेकिन वे भूल गए कि यह कश्मीर नहीं बंगाल है। उन्होंने बंगाल से ज्यादा कश्मीर के बारे में अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने कहा, राज्यपाल का पद सांविधानिक होता है। मेरी किसी भी राज्यपाल के साथ लड़ाई नहीं हुई है। तब वह ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न करते हैं? हम जानते हैं कि उनके पास फरमान कहां से आते हैं।

ममता ने सदन खत्म होने के बाद भी मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, मेरे राज्य में राज्यपाल के पद का बुरी तरह दुरुपयोग हुआ है। किसी को नहीं भूलना चाहिए कि राज्यपाल एक नामित पद होता है, लेकिन राज्य सरकार निर्वाचित होती है। हम किसी की दया पर नहीं हैं। प्रधानमंत्री समेत कोई भी मुझसे ऐसे बात नहीं करता है, जिस तरीके से धनखड़ करते हैं।

maharastra ka maha drama ka ant

खास बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बुधवार को बहुमत साबित करने का आदेश
  • आदेश के पांच घंटे बाद ही देवेंद्र फडणवीस ने दे दिया इस्तीफा
  • केवल चार दिन ही चल पाई महाराष्ट्र में फडणवीस की सरकार
  • ठाकरे 28 नवंबर को शाम 6.40 बजे शिवाजी पार्क में शपथ लेंगे 
महाराष्ट्र में महीने भर से चल रहा सियासी ड्रामा मंगलवार को रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट के बुधवार को बहुमत साबित करने के आदेश के मात्र पांच घंटे बाद ही सीएम देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को इस्तीफा सौंप दिया।
इससे पहले 23 नवंबर को रातों-रात भाजपा को समर्थन देने वाले एनसीपी नेता अजित पवार ने निजी कारणों से इस्तीफा देकर भाजपा को झटका दे दिया। इसके बाद बाद फडणवीस ने प्रेस कांफ्रेंस करके कहा, अब हमारे पास बहुमत नहीं रह गया।

हम विधायकों की तोड़फोड़ नहीं करेंगे और मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही फडणवीस की 78 घंटे पुरानी सरकार गिर गई। इस्तीफे के तत्काल बाद शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस का गठबंधन महाविकास अघाड़ी सरकार बनाने के लिए सक्रिय हो गया।

देर शाम बैठक में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को गठबंधन का नेता चुना गया। देर शाम बैठक में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को गठबंधन का नेता चुना गया। तीनों दलों के नेताओं राजभवन में राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया।

बैठक में तय हुआ कि ठाकरे 28 नवंबर को शाम 6.40 बजे शिवाजी पार्क में शपथ लेंगे। राज्यपाल ने इस पर सहमति देते हुए ठाकरे को बहुमत साबित करने के लिए तीन दिसंबर तक का समय दिया।

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत परीक्षण में देरी होने पर विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका देखते हुए बुधवार शाम पांच बजे तक फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया। आदेश आते ही दिल्ली से मुंबई तक हलचल तेज हो गई। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पीएम नरेंद्र मोदी को महाराष्ट्र की स्थिति की जानकारी दी। वहीं, मुंबई में एनसीपी, कांग्रेस-शिवसेना ने बैठक कर रणनीति बनाई। बैठक के बाद शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा, उद्धव ठाकरे पांच साल तक महाराष्ट्र के सीएम होंगे।

मेरा हिंदुत्व झूठा नहीं : उद्धव

कभी सोचा नहीं था सीएम बनूंगा। संघर्ष के समय बाला साहब की बहुत याद आती है। आप लोगों ने मुझे नेता चुना। हम परिवार की तरह काम करेंगे। आम आदमी को लगना चाहिए, उनकी सरकार है। फडणवीस की प्रेस कांफ्रेंस के बाद लगा कि अब रिश्ता नहीं रहना चाहिए। सरकार बनने के बाद बड़े भाई (पीएम मोदी) से मिलने दिल्ली जाऊंगा। शिवसेना ने हिंदुत्व की विचारधारा से समझौता नहीं किया। मेरे हिंदुत्व में झूठापन नहीं है। कुछ लोग कह रहे हैं कि हमने शिवसेना के आदर्शों का उल्लंघन किया, लेकिन मैं बताना चाहता हूं कि उनको पालकी में बिठाने के लिए शिवसेना की स्थापना नहीं हुई थी।
- उद्धव ठाकरे, शिवसेना प्रमुख, गठबंधन का नेता बनने के बाद

ज्यादा दिन नहीं चलेगी तीन पहिये की सरकार : फडणवीस

फडणवीस ने कहा, एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना की तीन पहियों की सरकार ज्यादा दिन नहीं टिकेगी, क्योंकि इनकी दिशा और विचारधारा अलग- अलग हैं। शिवसेना सत्ता के लिए लाचार हो गई है। इसलिए कल (सोमवार को) सोनिया गांधी के नाम की शपथ ली। जो लोग मातोश्री से बाहर नहीं निकलते थे, वे दूसरों की सीढ़ियां चढ़ने लगे हैं। जनता ने भाजपा-शिवसेना को जनादेश दिया था। भाजपा को सबसे ज्यादा 105 सीटें मिलीं। नतीजों के बाद शिवसेना ने मोलभाव किया, ढाई साल सीएम की बात नहीं हुई थी। हम शिवसेना का इंतजार किया, लेकिन उसने एनसीपी-कांग्रेस से चर्चा की।

अनिश्चितता खत्म करने को फ्लोर टेस्ट जरूरी : कोर्ट 

जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने फ्लोर टेस्ट का आदेश देते हुए कहा, विधानसभा चुनाव के नतीजे आए एक महीना बीत गया, लेकिन अनिश्चितता बनी है। स्थिर सरकार सुनिश्चित करने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना जरूरी है। सदन में तत्काल बहुमत परीक्षण ही सबसे प्रभावशाली तरीका है। कोर्ट ने राज्यपाल को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त कर विधायकों को शपथ दिलाने और शाम पांच बजे तक बहुमत परीक्षण कराने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि बहुमत परीक्षण गुप्त मतदान से नहीं होगा और सदन की कार्यवाही का सीधा प्रसारण होगा।

भाजपा कालिदास बने प्रोटेम स्पीकर

भाजपा विधायक कालीदास कोलंबकर को महाराष्ट्र विधानसभा का प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है। मंगलवार शाम कोलंबकर ने राजभवन जाकर पद और गोपनीयता की शपथ ली। उन्होंने कहा, 27 नवंबर को विधानसभा का सत्र बुलाया गया है। उसी दिन विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी।

माफी मांगें फडणवीस : कांग्रेस 

झूठ और दलबदल पर आधारित सरकार ताश के पत्तों की तरह गिर गई। पीएम मोदी और गृहमंत्री बताएं कि राज्यपाल को कठपुतली की तरह क्यों इस्तेमाल किया? अल्पमत सरकार बनाकर इतने दिन बहुमत का ड्रामा क्यों किया और भ्रष्टाचार के मुकदमे क्यों वापस लिए गए?
 - रणदीप सुरजेवाला, प्रवक्ता, कांग्रेस

यह जनता की जीत: एनसीपी 

यह जनता की जीत है। महाराष्ट्र के लोगों ने भाजपा नेताओं के अहंकार को खारिज कर दिया है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार स्पष्ट कर चुके हैं कि उद्धव ठाकरे अगले मुख्यमंत्री होंगे। हमारे गठबंधन की सरकार पांच साल ही नहीं, बल्कि अगले 20 से 25 साल चलेगी।
- नवाब मलिक, प्रवक्ता, एनसीपी

Friday, November 22, 2019

बड़ी खबर ::: हाईकोर्ट ने आउटसोर्सिग भर्तियों पर लगायी रोक ,

Saturday, November 23, 2019
बड़ी खबर ::: हाईकोर्ट ने आउटसोर्सिग भर्तियों पर लगायी रोक , कहा- सेवा प्रदाता फर्मो के जरिये भर्तियां कानून के खिलाफ , क्लिक करे और पढ़े पूरी पोस्ट
बड़ी खबर ::: हाईकोर्ट ने आउटसोर्सिग भर्तियों पर लगायी रोक , कहा- सेवा प्रदाता फर्मो के जरिये भर्तियां कानून के खिलाफ ,







हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ ने अहम फैसला देते हुए पूरे प्रदेश में नियमित स्वीकृत पदों पर आउटसोसिर्ंग से हो रही भर्तियों पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि सेवा प्रदाता फर्मो के जरिये धड़ल्ले से हो रही भर्तियां कानून की मंशा के खिलाफ हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति मुनीस्वर नाथ भंडारी व न्यायमूर्ति विकास कुँवर श्रीवास्तव की पीठ ने याची मेसर्स आरएमएस टेक्नोसलूशन लिमिटिड की ओर से दायर याचिका पर दिए है। याची ने याचिका दायर कर मांग की है कि सरकार ने उसका रजिस्ट्रेशन खारिज कर दिया है। जिसे बहाल किया जाए। अदालत ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार से जानकारी मांगी । अदालत ने जानना चाहा कि आउट सोर्सिग से नियमित पदों के सापेक्ष संविदा या कांट्रैक्ट पर किस तरह से भर्तियां हो रही हैं। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि सवरेच्य न्यायालय के उमा देवी के केस के बाद 13 वर्ष बीत चुके हैं। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पदों को भरे जाने संबंधी सरकार की क्या नीति है। सुनवाई के समय यह बात भी आयी कि आउटसोर्सिग से भर्ती किया जाना न्यायोचित नही है। सरकार की ओर से बताया गया कि इस मामले में सरकार नीति बना रही है और शीघ्र ही भर्ती की नीति बन जाएगी। अदालत ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए पूरे प्रदेश में मैन पावर सप्लाई से सरकारी दफ्तरों में भर्तियों पर रोक लगा दी है। अदालत ने एक सप्ताह में सरकार से स्पस्टीकरण मांगते हुए अगली सुनवाई 27 नवम्बर को नियत की है।

दबंग छवि का बना जिला अस्पताल का सी एम एस किशन पाठक

सुल्तानपुर
अपनी किसी न किसी कारस्तानी को लेकर जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक अक्सर चर्चित बने रहते है  पिछले 10 बर्षों से भी ज्यादा समय से ये सुल्तानपुर जिला अस्पताल में जमे हुए है परंतु जब से ये यहां के सी एम एस बने इन्होंने अपनी दबंगई को बढ़ावा दे दिया इनकी दबंगई के चलते इनकी कार्यप्रणाली से त्रस्त होकर के जिला अस्पताल के  अच्छे चिकित्सको ने जिला अस्पताल से त्याग पत्र भी दे दिया कई चिकित्सकों ने  तो महीनों से अवकाश ले रखा है जिससे ओ पी डी की कुर्सियाँ खाली चल रही है और मरीज भी जिला चिकित्सालय में बेहतर चिकित्सको के न होने की वजह से जिला अस्पताल में इलाज करवाने के नाम पर तौबा कर रहे है
जिला चिकित्सालय में बीते दिनों सी एम एस बी बी सिंह द्वारा एक युवक की पिटाई का वीडियो वायरल हुआ , जिसके बाद जिलाधिकारी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए सी एम ओ को जाँच सौप दिया है, बहरहाल, सी एम ओ द्वारा इस मामले की जाँच की जा रही है , वही इस मामले को लेकर दो वीडियो वायरल हुये है, एक वीडियो सी एम एस व् युवक का , वही दूसरा वीडियो तीन युवक के साथ का है जहां एक युवक हाथ में सिरिंज लिया है , वही दोनों युवक आपस में कुछ बाँट रहे है। बहरहाल ,अगर सी एम एस के आरोप सत्य है और  यह वायरल वीडियो दोनों सही है , तो सवाल यह उठता है कि हॉस्पिटल के अन्दर किसके इशारे पर और  सँरक्षण पर दलाली का खेल हो रहा है , वह कौन है जो जिला चिकित्सालय में दलाली का नेटवर्क फैला रक्खा है , जिसको सी एम एस बी बी सिंह तलाश रहे है , सूत्रों का कहना है कि सी एम एस ने तो खुद ही अपनी भाई की निजी कंपनी की दवा लिखवाने के लिए सगे संबंधियों को भी जिला अस्पताल में शामिल कर रखा है जिससे कि दलालो में अपनी अपनी दवा को चिकित्सको से लिखवाने  के लिए आपसी रार मची हुई है बहरहाल , मामला चर्चा में होने के बाद भी गुप् चुप तरीके से दलाल अपने कार्यो को अंजाम दे रहे है देखना है कि जिलाधिकारी सी इंदुमती इस पूरी प्रक्रिया में जांच रिपोर्ट के आधार पर क्या निर्णय लेती है ज्ञात हो कि पूर्व जिलाधिकारी विवेक  भी सी एम एस को कई बार फटकार लगा चुके है और उनके साथ सी एम एस का विवाद काफी दिनों तक मीडिया की सुर्खियों में रहा

सर्वे से भवन स्वामी सशंकित

गंगा के किनारे दो सौ मीटर के दायरे में स्थित एक एक भवनो का सर्वे  वीडीए द्वारा किया जा रहा है उसमे जर्जर व निर्माण हुए भवनो की जांच कर भवन स्वामियो के नाम पता नोट करने के साथ ही भवनो के फोटो भी लिये जाने  के साथ ही निर्माण हुए  भवनो की वैघता भी भवन स्वामियो से मागी जा रही है जिससे भवन स्वामी सशंकित हो गये हैं / राजघाट से नगवा सामने घाट तक के भवनो के निरीछण के 16 टिमे बनाई गयी है /वीडीए सूत्रों के अनुसार जांच के बाद  वीडीए मे उपलब्ध  पत्रावलियो से  भवन की मौजुदा  स्थित से मिलान किया जाएगा /गौरतलब है कि गंगा के किनारे की प्राचीनता को कायम रखने के लिए  कौटिल्या सोसाइटी की ओर से गंगा के किनारे प्राचीनता को कायम रखने के लिए हाईकोर्ट मे याचिका दाखिल किया गया था उस सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गंगा के किनारे दो सौ मीटर के दायरे में स्थित किसी भी तरह के ऩव  निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया गया  वह आदेश 2001 से लागू  हो गया निर्देश पर प्रतिबंध लगा दिया उसके बाद भी  प्रतिबंध इलाके मे येन केन प्राकेरेण नवनिर्माणो का दौर जारी रहा /कौटिल्या सोसाइटी के शिकायत पर समय समय पर अभियान चलाकर वीडीए प्रशासन द्वारा अभियान चलाकर अवैध निर्माणो को ध्वस्त किया गया /सूत्रो की माने तो कुछ भवन ऐसे जिसको तत्कालिन अधिकारियो द्वारा ध्वस्तिकरण की आधा अधुरा कार्यवाही कर कागजी कोरम पूरा कर दिया गया था /वीडीए मे उपलब्ध पत्रवाली से मिलान करने  के उन भवनो के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही हो सकती है                            सर्वे से भवन स्वामी सशंकित